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चाँद के बारे में रोचक जानकारी

चाँद के बारे में रोचक जानकारी

चाँद के बारे में रोचक जानकारी
हमारे सौरमंडल में ऐसे बहुत से ग्रह और उपग्रह है जो कि बहुत बड़े भी है छोटे भी हैं क्योंकि हमारा ब्रह्मांड में एक विस्फोट हुआ था जिसके कारण इन सभी चीजो का निर्माण हुआ और उस विस्फोट के कारण कुछ बड़े और छोटे को कुछ बिल्कुल छोटे धरा और पिंडो का निर्माण हुआ था उनके अंदर सूरज चांद धरती जैसी चीजें शामिल है हमने लगभग सभी चीजों के बारे में आज के समय में पता लगा लिया है धरती के बारे में तो हम सदा से ही जानते आ रहे हैं और सूरज एक बहुत ही गरम आग का गोला है इसलिए हम उसके बारे में उसके पास तो जाकर जान नहीं सकते हैं लेकिन इसके अलावा हमने और बहुत से ग्रहों के ऊपर जाकर पता लगा चुके हैं कि इस पर क्या चीज है और किस धातु से बना हुआ है और इस पर क्या-क्या चीजें मिलती है चीजों के अंदर एक ऐसी चीज है जिसके बारे में बहुत कुछ पता लगाया जा चुका हैचांद के ऊपर गुरुत्वाकर्षण बल नहीं है जिसके कारण अगर हम वहां पर 7 किलो वजन चांद के ऊपर गुरुत्वाकर्षण बल की कमी होने के कारण अगर वहां पर कोई आदमी 60 किलो का है तो वहां पर सिर्फ वह 10 किलो वजन का रहेगा और अमेरिकी सरकार ने आदमी को भेजने ओसामा बिन लादेन को ढूंढने के बराबर टाइम और पैसा खर्च किया उसके अंदर 10 साल और 10 बिलियन डॉलर का खर्चा हुआ.
और आज के समय वैज्ञानिक उसके ऊपर सिर्फ जीवन को संभव करने के बारे में सोच रहे हैं हम दोस्तों बात कर रहे हैं चांद की हम बात कर रहे हैं चांद की चांद एक ऐसा ग्रह है जिसके ऊपर लगभग जीवन को संभोग करने की बहुत सी चीजें मौजूद है पहले दांत के बारे में किसी को पता नहीं था लेकिन सबसे पहले चांद के ऊपर एक अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने कदम रखा और उन्होंने चांद के बारे में जानकारी धरती के लोगों को बताइए और फिर उसके बाद और भी बहुत से लोगों ने वहां पर अपने अपने रिसर्च शुरू किए और उसके अंदर भारत भी एक ऐसा देश है जिसने रिसर्च की ओर भारत ने सबसे पहले चांद के ऊपर पानी की खोज की जो कि उससे पहले किसी ने भी इस कोर्स के बारे में नहीं सोचा था
लेकिन भारत में चांद के ऊपर पानी की खोज की और इसके अलावा चांद के ऊपर बहुत सी ऐसी चीजों को खोजा गया है जो कि वहां पर जीवन संभव करने के लिए फायदेमंद हो सकती है वैसे तो चांद धरती के जैसा ही है लेकिन इसके ऊपर ऑक्सीजन ना होने के कारण इस के ऊपर जीवन संभव नहीं है तो आज हम आपको इस पोस्ट के अंदर चांद के बारे में कुछ महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी आपको बताएंगे शायद आप उस जानकारी को पहले ना पढ़ पाए हो तो आज हम आपको इस पोस्ट में पूरी और रोचक जानकारी देंगे इसमें हम आपको कुछ ऐसे रोचक तथ्य बताएंगे जो कि चांद के बारे में है
चांद के बारे में ऐसी बहुत सी रोचक जानकारी है जो आप नहीं जानते हैं और वह जानकारी आपके लिए जानना बहुत ही जरूरी है क्योंकि चांद से संबंधित बहुत से प्रसन्न आज के समय में एग्जाम में आते हैं और हर साल एक दो या तीन कृष्ण तो चांद से संबंधित प्रश्न चांद से संबंधित है एग्जाम में जरूर आते हैं तो यदि आप हमारी रोचक जानकारी को पढ़ते हो शायद आपको प्रश्न का उत्तर यहां पर मिल जाए और अगर आप इसको अच्छी तरह से याद करोगे तो शायद आपको बहुत फायदा भी मिलेगा तो आप इस जानकारी को अच्छी तरह से और ध्यान से पढ़े हम आपको चांद से संबंधित लगभग सभी बातें इस जानकारी में बताएंगे अच्छी तरह से आपको चांद के बारे में जानकारी देंगे

चाँद के बारे में रोचक जानकारी

1. अब तक सिर्फ 12 मनुष्य चाँद पर गए है.
2. चांद धरती के आकार का सिर्फ 27प्रतीशत हिस्सा ही है.
3. चाँद का वजन लगभग 81,00,00,00, 000(81 अरब) टन है.
4. पूरा चाँद आधे चाँद से 9गुना ज्यादा चमकदार होता है.
5. नील आर्मस्ट्रोग ने चाँद पर जब अपना पहला कदम रखा तो उससे जो निशान चाँद की जमीन पर बना वह अब तक है और अगले कुछ लाखों सालो तक ऐसा ही रहेगा.क्योंकि चांद पर हवा तो है ही नही जो इसे मिटा दे.
6. जब अंतरिक्ष यात्री एलन सैपर्ड चाँद पर थे तब उन्होंने एक गोल्फ बॉल को हिट मारा जोकि तकरीबन 800 मीटर दूर तक गई.
7. अगर आप का वजन धरती पर 60 किलो है तो चाँद की low gravity की वजह से चाँद पर आपका वजन 10किलो ही होगा.
8. चाँद पर पड़े काले धब्बों को चीन में चाँद पर मेढ़क कहा जाता है.
9. जब सारे अपोलो अंतरिक्ष यान चाँद से वापिस आए तब वह कुल मिलाकर 296 चट्टानों के टुकड़े लेकर आए जिनका द्रव्यमान(वजन) 382 किलो था.
10. चाँद का सिर्फ 59 प्रतीशत हिस्सा ही धरती से दिखता है.
11. चाँद धरती के ईर्ध-गिर्द घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरह रखता है इसलिए चाँद का दूसरा पासा आज तक धरती से किसी मनुष्य ने नही देखा.
12. चाँद का व्यास धरती के व्यास का सिर्फ चौथा हिस्सा है और लगभग 49
चाँद धरती में समा सकते हैं.
13. क्या आपको पता है चाँद हर साल धरती से4 सैटीमीटर दूर खिसक रहा है.अब से 50 अरब साल बाद चाँद धरती के ईर्द-गिर्द एक चक्कर 47 दिन में पूरा करेगा जो कि अब 27.3 दिनो में कर रहा है.पर यह होगा नही क्योकि अब से 5 अरब साल बाद ही धरती सूर्य के साथ खत्म हो जाएगी.
14. सौर मंडल के 63 उपग्रहो में चाँद का आकार 5 वे नंम्बर पर
15.  सभी का मानना है कि चांद गोल है लेकिन चांद गोल नहीं है यह अंडे के आकार का है
16. चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से कम होती है। अगर आंकड़ों में बात की जाए तो चांद पर इंसान का वजन 16.5% कम होता है। यही कारण है कि चांद पर अंतरिक्ष यात्री ज्यादा उछलकूद कर सकते हैं
17.  खबरों के मुताबिक 1950 में अमेरिका ने चांद को एटम बम से उड़ाने की योजना बनाई थी। अमेरिका के सैन्य अधिकारियों ने यह सनसनीखेज योजना अपने धुर विरोधी रूस को अपनी ताकत से खौफजदा करने के लिए रची जब दोनों देशों के बीच शीत युद्ध अपने चरम पर था
18. अगर आप अपने इंटरनेट की स्पीड से खुश नहीं हैं तो आप चांद का रुख कर सकते है। जी हां, नासा ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए चांद पर वाई-फाई कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई है जिसकी 19 एमबीपीएस की स्पीड बेहद हैरतअंगेज है
19. चाँद धरती के ईर्ध-गिर्द घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरह रखता है इसलिए चाँद का दूसरा पासा आज तक धरती से किसी मनुष्य ने नही देखा। हालाँकि बाकि हिस्से का फोटो लिया जा चूका हैं
20. पृथ्वी का परिभ्रमण करने के दौरान चंद्रमा की विभिन्न प्रावस्थाएँ, जो पृथ्वी, चंद्रमा तथा सूर्य की सापेक्ष स्थिति में होने वाले परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होती हैं। चंद्रमा की इन्हीं प्रावस्थाओं को नवचंद्र, पूर्णचंद्र आदि की संज्ञा दी जाती है
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धरती के बारे में 25 रोचक तथ्य

धरती के बारे में 25 रोचक तथ्य

धरती के बारे में 25 रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं कि धरती ही एक ऐसी सौर मंडल में चीज है जिसके ऊपर जीवन संभव है इसके अलावा और किसी भी ग्रह या उपग्रह पर जीवन संभव नहीं है धरती से हमें बहुत चीज़े प्राप्त होती है जिससे की हम धरती के ऊपर जीवन यापन कर रहे हैं अगर आप हम बात करें दूसरे किसी तरह की या उपग्रह की तो उन पर यह सभी चीजें पूरी तरह से नहीं मिल पाती जो कि हमें धरती पर मिलती है हां कुछ ग्रह जरूर है जिनमें धरती पर मिलने वाली चीजें मिल रही है लेकिन जो चीजें हमें धरती पर मिलती है उसे सभी चीजें उन ग्रहों के उपग्रहों पर नहीं मिलती जिससे कि हमारा जीवन उनके ऊपर संभव नहीं है धरती पर हमें पानी खाना हवा और पेड़ पौधे यह सभी चीजें मिल रही है इसलिए हमारा जीवन धरती के ऊपर संभव है और हम खुशी खुशी से जीवन जी रहे हैं लेकिन अगर हम बात करें दूसरे किसी करोगी तो किसी ग्रह पर हवा नहीं है तो किसी पर पानी नहीं है हां पानी चंद्रमा पर ढूंढ लिया गया है और अनुमान लगाया जा रहा है कि चंद्रमा पर भी जीवन संभव हो सकता है.
और धरती पर हमारे जीवन के लिए पहले से ही ऐसी चीजें मौजूद थी जिसे कि हमारा जीवन आसान हो गया लेकिन अगर हम किसी दूसरे ग्रह की बात करें तो उन पर ऐसी चीजें मौजूद नहीं है जिससे कि हम उन पर जाकर जीवन जिसके उन पर हमें अगर अपना जीवन संभव करना है तो हमें उसके ऊपर धरती से ही कुछ ऐसी चीजें ली जानी पड़ेगी जिस से कि हमारा जीवन जीने का सपना पूरा हो सके लेकिन अगर हम जीवन जीना चाहते हैं किसी दूसरे ग्रह पर सीधे जाकर तो हम उस पर सीधे जी नहीं जी सकते इसलिए हमें धरती से बहुत ही लगाओ रखना चाहिए और धरती पर जो चीजें मौजूद हैं उनका विनाश नहीं करना चाहिए उनकी हमें रक्षा करनी चाहिए तो आज हम आपको इस पोस्ट में भर्ती से संबंधित कुछ ऐसी चीजें बताएंगे जो कि आपके लिए बहुत ही जरूरी है जिसके लिए आप को हम कुछ ऐसी रोचक जानकारी बताएंगे जो कि आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और इसको जान आपके लिए बहुत ही जरूरी है क्योंकि आप के सामान्य ज्ञान के लिए भी बहुत ही आवश्यक है.
धरती के बारे में 25 रोचक तथ्य
♦ आज से 450 करोड़ साल पहले पृथ्वी से एक ग्रह टकराया था जिस के कारण पृथ्वी मूड गई और पृथ्वी का एक हिस्सा भी टूट गया था जिसे हम चाँद के नाम से जानते है .
♦ सौर मंडल में पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है जिस जीवन है
 ♦ दुनिया का 90% कूड़ा कचरा समुन्दर में जाता है और दुनिआ में सिर्फ 3% पानी ही पीने योग्य है
♦ धरती के ऊपर इतना सोना मौजूद है की 1.5 फ़ीट की गहराई तक पूरी धरती को ढका जा सकता है.
♦ धरती पर हर सेकंड 100 बार आकाशीय बिजली गिरती है
♦ अंतरिक्ष में मौजूद कचरा से हर दिन एक टुकड़ा धरती पर गिरता है
♦ पृथ्वी पर होबा मीटिऑराइट नाम का एक बहुत बड़ा उल्का पिंड गिरा था . जिसका वजन 60 टन से भी ज्यादा था
♦ द ग्रेट वाल ऑफ चाइना अब अंतरिक्ष से भी दिखाई नहीं देती क्यूंकि चीन में वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है
♦ पृथ्वी को गर्मी सिर्फ सूर्य से नहीं उसे अपने अंदर से भी गर्मी मिलती है जिसका तापमान लगभग 6000 डिग्री सेल्शियस है जो कि सूर्य के तापमान के बराबर है
♦ पृथ्वी पर हर सेकंड 2 लोगो की मौत हो रही है .
♦ पृथ्वी की अभी तक की सबसे ज्यादा दूरी से ली गई फोटो की दुरी लगभग 5954573 किलोमीटर है जिसे पीला ब्लू डॉट का नाम दिया गया
♦ पृथ्वी पर मनुष्य के द्वारा सबसे गहरा गड्डा 1989 में रूस में खोदा गया जिसकी गहराई लगभग 12 किलोमीटर थी
♦ सूर्य में पृथ्वी जितने बड़े 13 लाख ग्रह समां सकते है
♦ पृथ्वी पर हर साल 5 लाख भूकंप आते है जिसमे से सिर्फ 100 भूकम्प ही खतरनाक होते है
♦ माउंट एवरेस्ट (8848 m)दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत है लेकिन अगर पृथ्वी के केन्द से लेकर अंतरिक्ष की दुरीको देखे तो चिम्बोराजो (6268 m) पर्वत सबसे ऊँचा है .
♦ 23 घंटे 56 मिनट्स 4 सेकण्ड्स में पृथ्वी अपने धुरी पर घूम लेती है और एक दिन पूरा कर लेती है इसके हिसाब से एक दिन में 23 घंटे 56 मिनट्स 4 सेकण्ड्स होते है .
♦ गोबेकली टेप टर्की मनुष्य के द्वारा बनाया गया सबसे पुराना धार्मिक स्थल है
♦ दुनिया का सबसे महंगा प्रोजेक्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जिसकी लागत 150,000,000,000 रूपए है .
♦ अगर किसी मनुष्य को बिना सुरक्षा उपाय के अंतरिक्ष में छोड़ दिया जाए तो वह केवल 2:00 मिनट तक ही जीवित रहेगाधरती पर हर साल 77 लाख लोगों का बोझ बढ़ जाता है
दुनिया में हर साल 5 लाख भूकंप आते हैं। इनमें से एक लाख भूकंप सिर्फ महसूस किए जाते हैं जबकि 100 विनाशकारी होते हैं
ग्लास की एक बोतल को पूरी तरह नष्ट करने में 4 हजार से भी ज्यादा साल लगते हैं
इंसान द्वारा सबसे पुराना धार्मिक स्थल गोबेकली टेप तुर्की में स्थित है। इसका निर्माण 10,000 वर्ष ईसा पूर्व किया गया था
धरती के गुरूत्वाकर्षण के कारण पर्वतों का 15,000 मीटर से ऊँचा होना संभव नही है.
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ब्रह्मांड क्या है ब्रह्मांड कैसे बना ब्रह्मांड के बारे में जानकारी

ब्रह्मांड क्या है ब्रह्मांड कैसे बना ब्रह्मांड के बारे में जानकारी

ब्रह्मांड क्या है ब्रह्मांड कैसे बना ब्रह्मांड के बारे में जानकारी
हमारा ब्रह्मांड बहुत बड़ा है. और इतना ज्यादा बढ़ा है. कि हम कभी इसकी कल्पना भी नहीं कर पाएंगे. और यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी चुनौती भी है. इस इतने बड़े ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी यानी धरती एक छोटे से कण से भी छोटी है. इतने विशाल ब्रह्मांड में कंही पर बहुत ज्यादा रोशनी है. तो कहीं पर बहुत अंधेरा है. कहीं पर करोड़ों डिग्री सेल्सियस तक तापमान है. तो कहीं पर बहुत ठंड भी है. इतनी ज्यादा ठंड कि इसका कोई अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता. यह ठंड इतनी ज्यादा है. जो कि बर्फ से भी कई गुना ज्यादा ठंडी है.और इतने बड़े और विशाल ब्रह्मांड में हमारे सूर्य से भी बहुत ज्यादा शक्तिशाली ग्रह या तारे मौजूद है. और इस ब्रम्हांड में बर्फ से भी बहुत ठंडे ग्रह भी मौजूद हैं और ब्रह्मांड में बहुत सी जगह पर जीवन संभव है.कुछ ऐसी जगह है. जिसके ऊपर जीवन जीने के बारे में हम सोच भी नहीं सकते हैं. क्योंकि वह जगह इतनी खतरनाक है जिसके ऊपर जाने से कुछ दूरी पहले ही हमारी मौत हो जाएगी और उस जगह के ऊपर हम कभी जा भी नहीं पा सकते हैं.
जब ब्रह्मांड की बात की जाए तब हमें यह जरूर जान लेना चाहिए ब्रह्मांड दो तरह के होते हैं. एक तो दृश्य ब्रह्मांड और एक अदृश्य ब्रह्मांड दृश्य ब्रह्मांड वह ब्रह्मांड है. जिसे हम देख सकते हैं. और जिसका सर्जन बिग बंग के प्राथमिक Raw Material से हुआ है. जैसे ग्रह ,तारे उल्काए ,Galaxy, निहारिकाऐ, काला पदार्थ ,प्रकाश, गति, समय ,गुरुत्वाकर्षण आदि अदृश्य ब्रहमांड उस जगह को कहा जाता है. जो कि हमारे ब्रह्मांड के बाहर की जगह होती है. और हमें वह कभी दिखाई नहीं देती है. उस जगह को अदृश्य ब्रह्मांड कहा जाता है. हमारी तरफ से ब्राह्मण की सीमाओं के बाहर के अज्ञात अदृश्य ब्रह्मांड में क्या है. वो किसी को मालूम नहीं है. अदृश्य ब्रह्मांड के इतने बड़े विस्तार को मापने के लिए प्रकाश वर्ष का इस्तेमाल किया जाता है. और प्रकाश वर्ष ब्रह्मांड की दूरी को मापने वाली चीज .है जिस तरह हम पृथ्वी पर दूरी को किलोमीटर या मील में मापते हैं. उसी तरह ब्रह्मांड की दूरी को मापने के लिए प्रकाश वर्ष का इस्तेमाल किया जाता है. और 1 साल में जितनी दूरी प्रकाश वर्ष तय करता है. उसको एक प्रकाश वर्ष कहा जाता है. एक सेकंड में लगभग 3 लाख किलोमीटर की दुरी काटता है इस हिसाब से 1 साल में 9.5 हज़ार अरब किलोमीटर का दुरी काट लेता है .और इस 9.5 हजार अरब किलोमीटर को एक प्रकाश वर्ष कहा जाता है. बिग बैंग से जन्मे हमें ब्रह्मांड का विस्तार 93 अरब प्रकाश की दुरी में है.
अब आप ही यह बात जरूर सोच रहे होंगे कि जब हमारा दृश्य ब्रह्मांड 13.5 अरब वर्ष पुराना है तो उसका विस्तार इतना ज्यादा क्यों है. उसका विस्तार 93 अरब प्रकाश वर्ष कैसे हो सकता है लेकिन यदि हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे तो यह पोस्ट बहुत ज्यादा बड़ी हो जाएगी और आपको अच्छे से समझ में नहीं आएगा. इसलिए हम इसके बारे में आप को एक अलग पोस्ट में जरूर बताएंगे. लेकिन  हमारा दृश्य ब्रह्मांड 93 अरब प्रकाश वर्ष के विस्तार में  फैला है उसके आगे जो अदृश्य ब्रह्मांड है उसमें क्या है. वह आज तक किसी को पता नहीं चल पाया है और उसके बारे में आज तक हमें किसी भी तरह की जानकारी नहीं मिल पाई है. तो  इस पोस्ट में हम आप को सिर्फ यहां पर अपने दृश्य ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में जानकारी दे रहे हैं. अदृश्य ब्रह्मांड के बारे में बाद में अलग पोस्ट में जानकारी मैं आपको जरुर दूंगा
1927 में Georges Lemaitre ने बेल्जियम में प्रकाशित एक कागज का खुलासा किया. जिसने विस्तारित ब्रह्मांड के मामले में सामान्य रिलेटिविटी के समीकरणों का एक समाधान प्रदान किया उनके ज्ञान के बिना पहले ही 1922 में रूसी अलेक्जेंडर फ्रिडमैन ने अपने ज्ञान  बिना यौगिक के किया था. लेकिन फ्रिडमैन मुख्य रूप से एक आदर्श श्रेणी के गणित में दिलचस्पी रखते थे (व्यापकताएं बढ़ाने और अनुबंध करने सहित) और संभावना को आगे नहीं बढ़ाया था. कि इनमें से भौतिक ब्रह्मांड का वास्तव में वर्णन हो सकता है. इसके विपरीत Lemaitre ने ब्रह्माण्ड विज्ञान की समस्या को पूरी तरह से शारीरिक रूप से देखा. और यह महसूस किया कि उनके समाधान ने आकाशगंगाओं के वास्तविक ब्रह्मांड के विस्तार की भविष्यवाणी की है. इसका सुझाव देना शुरू हो गया था.

ब्रह्माण्ड की रचना

Georges Lemaître ने Friedmann Lemaitre Robertson walker  नाम का समीकरण बनाया जो अलबर्ट आइन्स्टीन की Theory of general relativity पर आधारित था. इनके अनुसार ब्रम्हांड की उत्पत्ति एक प्राथमिक परमाणु से हुई और एक महाविस्फोट के साथ ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ. और ब्रह्माण्ड के पदार्थ एक दुसरे से दूर जाने लगे तो शुरुवाती दिनों  में  Lemaitre की थ्योरी का मजाक उड़ाया गया. Lemaitre  की इस थ्योरी का सबसे ज्यादा खंडन करने वाले वैज्ञानिक Fred Hoyle थे. Hoyle की थ्योरी के अनुसार ब्रह्माण्ड के पिंड एक दुसरे से दूर नहीं जा रहे. बल्कि उनके बीच में नए पदार्थ स्थापित हो रहे हैं. जिसे काला पदार्थ कहते हैं। उन्होंने Fred Hoyle  model theory को प्रकट किया और Lemaître की theory को बिग बैंग आईडिया कहकर उनका मज़ाक उड़ाया बहुत समय तक दुनिया के वैज्ञानिक इन दो सिधान्तो के बीच बंटे रहे. लेकिन जैसे जैसे समय बीतत़ा गया. वैसे वैसे वैज्ञानिक प्रयोगों से यह साबित हुआ. की Lemaître की Big bang theory ही सच है जो पहले उनकी बातों का खंडन कर रहे थे. बाद में उनको भी यह बात आसानी से समझ में आ गई. सन 1965 में cosmic microwave background की खोज ने Lemaître की Big bang theory को सबसे ज्यादा मान्य सिधांत  का दर्जा दिलवाया. आज Lemaître की Big bang theory ब्रम्हाण्ड की निर्माण के लिए सबसे ज्यादा मान्य सिधांत माना जाता है.
बिग बैंग थ्योरी के अनुसार आज से लगभग 13.5 अरब साल पहले ब्रह्माण्ड के सभी अणु परमाणु और दुसरे के पास थे. इतने पास की सभी एक ही जगह पर थे जो सारा दृश्य ब्रह्माण्ड जो हम आज देख रहे हैं. वो एक छोटे से बिंदु में स्थित था. और उस वक्त वो बिंदु बिग बैंग थ्योरी के अनुसार आज से लगभग 13.5 अरब साल पहले ब्रह्माण्ड के सभी अणु परमाणु और दुसरे के पास थे. इतने पास की सभी एक ही जगह पर थे. मानलो की सारा दृश्य ब्रह्माण्ड जो हम आज देख रहे हैं. वो एक छोटे से बिंदु में स्थित था. और उस वक्त वो बिंदु अपार घनत्व वाला और  बहुत ज्यादा गर्म रहा होगा. यंहा पर Physics के कोई भी नियम काम नहीं करते इस अवस्था में अन्तरिक्ष और टाइम का भी कोई अस्तित्व नहीं था.उस परिस्थिति में किसी अज्ञात कारण से अचानक एक विस्फोट हुआ. जिस से ब्रह्माण्ड का जन्म हुआ. और ब्रह्माण्ड का विस्तार होना शुरू हो गया.
ब्रह्माण्ड के सारे पदार्थ एक दुसरे से दूर जाने लगे इस विस्फोट को बिग बैंग कहा जाता है वाला और अत्यंत गर्म रहा होगा। ये वो स्थिति है. जहाँ पर Physics के कोई भी नियम काम नहीं करते इस अवस्था में अन्तरिक्ष और टाइम का भी कोई अस्तित्व नहीं था. उस परिस्थिति में किसी कारण से अचानक एक विस्फोट हुआ. जिस से ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ. और ब्रह्माण्ड का बनना शुरू हो गया. ब्रह्माण्ड के सारे पदार्थ एक दुसरे से दूर जाने लगे. इस विस्फोट को बिग बैंग कहा जाता है. अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा. कि जब इतना शक्तिशाली विस्फोट हुआ तो उस समय ब्रहमांड में कितनी गर्मी होगी या उसका तापमान कितना होगा.  उस समय ब्रह्माण्ड का तापमान 141,679, 000,000,000,000,000,000,000,000,000 कितना तापमान उस समय में ब्रह्मांड में था. जिसका हिसाब लगाना भी लगभग नामुमकिन है. और इस इतने शक्तिशाली विस्फोट होने के बाद  1 micro second से भी कम समय को blank time कहा जाता है. इतने कम समय में ब्रह्मांड का तापमान बहुत जल्दी नीचे गिर गया और 1 micro second होते होते तो ब्रह्माण्ड 10,000 अरब तक हो गया.
जब ब्रह्मांड में विस्फोट हुआ तो. उस समय सब कुछ अंधेरे में था .उस समय किसी भी तरह की रोशनी नहीं थी. लेकिन आप यह जरूर सोच रहे होंगे. कि जब इतना बड़ा विस्फोट हुआ तो रोशनी क्यों नहीं थी. क्योंकि ब्रम्हांड प्लाज्मा अवस्था में था और ब्रह्मांड कोई भी अणु नहीं थे. और इसीलिए रोशनी नहीं थी और इसी तरह से यह अंधेरा ब्रह्मांड में 3.80 लाख सालों तक चलता रहा. और इस अंधेरे में ही ब्रह्मांड में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाने लगे और प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को मिलने से ब्रह्मांड में सबसे पहला अणु उत्पन्न हुआ जो हाइड्रोजन  था. और हाइड्रोजन का ब्रह्मांड के निर्माण में बहुत ज्यादा महत्व है. क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के कारण हाइड्रोजन और  हाइड्रोजन के मिलने से हीलियम के अणु बनने शुरू हुए. और फिर ब्रह्मांड को अपना सबसे पहला तारा यानी सूरज मिला और इसी तरह से धीरे-धीरे ब्रह्मांड में और भी तारे बनने लगे. और इस तरह से ब्रह्मांड में पहली बार रोशनी हुई और इस तरह से अंधेरा खत्म हो गया. और बिग बैंग के लगभग 4 लाख साल बाद ब्रह्मांड में रोशनी पैदा हुई.
और इस तरह से धीरे-धीरे बाद में बिग बैंग से निकले cosmic matter से ब्रह्मांड में और दुसरे धूमकेतु, उल्का, ग्रह और आकाशीय पिंड बनाने शुरू हो गए लगभग 8 अरब सालों तक ब्रह्मांड में इन अणु का बनना और खत्म होना चलता रहा. और इस तरह से ही एक घटना में लगभग आज लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले हमारे सूर्य और सौरमंडल का निर्माण हुआ. जिसमें हमारी पृथ्वी भी शामिल थी सूर्य के साथ ही 4.5 अरब साल पहले धरती भी बन चुकी थी. और जब पहली बार धरती बनी तो आज के समय जैसी बिल्कुल भी नहीं थी. यह एक बहुत गरम आग का गोला होती थी. और उस समय में अगर इसके को देखा जाए तो यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था. कि इस पर भी कभी जीवन संभव हो पाएगा. और वह अपनी ही धुरी पर बहुत तेजी से घूमती थी. और उस समय में दिन सिर्फ 8 घंटे का हुआ करता था. और धरती पर पानी तो देखने के लिए बिल्कुल भी नहीं था.
लेकिन धरती पर हवा में भाप मौजूद था. और H2Oजैसे कई सारे तत्व मौजूद थे. जिस तरह से ब्रह्मांड बना था और उसके बाद उसके तापमान में बहुत तेजी से गिरावट आई इसी तरह से ही धरती के तापमान में भी धीरे-धीरे गिरावट और धरती के ऊपर हवा में मौजूद भाप के कारण धरती पर बारिश होने लगी और लाखों सालों तक होती हुई. इस बारिश के कारण धरती पर नदी जलाशय और समंदर बनने लगे. और इसके बाद धीरे-धीरे लगभग 3.5 अरब साल पहले पानी में हाइड्रोजन ऑक्सीजन और कार्बन के मिलने से जीवन पनपना शुरू हुआ. और धरती पर अपने एककोशीय जीव बने जो पैरामीशियम और अमीबा थे. और इन छोटे जीवाणुओं के कारण आगे धीरे-धीरे बहूकोशीय जीवाणु बनाने लगे. और धीरे-धीरे पृथ्वी पर जीव जंतुओं की भरमार हो गई. और धरती पर जीवन बनना शुरू हो गया.
आज हमने आपको इस पोस्ट पर एक बहुत ही अच्छी और फायदेमंद जानकारी आप को बताई है. हमने आपको आज इस पोस्ट में ब्रह्मांड की उत्पत्ति ब्रह्मांड क्या है ब्रह्मांड कैसे बना ब्रह्मांड की उत्पत्ति ब्रह्मांड के बारे में जानकारी ब्रह्मांड के रहस्य ब्रह्मांड की परिभाषा ब्रह्माण्ड की रचना ब्रह्माण्ड विज्ञान के बारे में पूरी और विस्तार से जानकारी दी है. और उसके एक एक चीज के बारे में हमने आपको बताया है. तो हमारे द्वारा बताई गई ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में जानकारी आपको अच्छी लगी होगी तो यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो शेयर करना ना भूले और यदि आपका इसके बारे में कोई सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं.
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सौरमंडल और ब्रह्मांड के बारे में रोचक जानकारी

सौरमंडल और ब्रह्मांड के बारे में रोचक जानकारी

सौरमंडल और ब्रह्मांड के बारे में रोचक जानकारी
हमने आपको इससे पहले ब्रह्मांड के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताए थे और वह आपको बहुत पसंद आए होंगे लेकिन अब हम आपको इस तरह की एक और जानकारी दे रहे हैं  इस जानकारी में हम आपको  सौर मंडल में बारे में बतायेगे की सौर मंडल क्या होता है और यह किस तरह से बना होता है सौरमंडल के बारे में कुछ और भी ऐसी जानकारी देंगे जो कि आपके लिए जाना बहुत ही जरुरी है वैसे तो हमारा सौरमंडल के अंदर बहुत से छोटे-छोटे ग्रह और उपग्रह हैं लेकिन उसके अलावा भी कुछ और भी चीजें होती हैं,
आपने पहले भी सौरमंडल के बारे में तो बहुत सुना होगा या कहीं पर उसके बारे में पढ़ा होगा लेकिन अगर आपने नहीं पढ़ा तो कोई बात नहीं हम आपको बता देते हैं कि सौर मंडल क्या होता है और यह कैसे बना होता है सौरमंडल एक ऐसा मंडल है जो कि गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक दूसरे छोटे तारों या कुछ अन्य ग्रहों के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हैं उन्होंने वस्तुओं के समूह को गहि मंडल कहा जाता है सौर मंडल में सूर्य और उसके कुछ खगोलीय पिंड शामिल होते हैं इसके अंदर जैसे अन्य तारे ग्रह है प्राकृतिक उपग्रह ,शुद्र ग्रह ,उल्काएं ,धूमकेतु ,बोने ग्रह ,खगोलीय दूरी और हमारा सूरज यह सब चीजें मिलकर हमारे सौरमंडल का निर्माण करती है और इनके अलावा सौरमंडल और भी अन्य पिंड और से मिलकर बना होता है
और अगर हम बात करें ब्रह्मांड की तो ब्रह्मांड बहुत बड़ा है इसका कोई अंत नहीं है ब्रह्मांड अनंत है वैसे तो ब्रह्मांड को नापा नहीं जा सकता के अंदर बहुत सी चीजें मौजूद है इसके अंदर अनेक ग्रह उपग्रह पिंड आकाशगंगाएं इन सभी चीजों से मिलकर ब्रह्मांड बना हुआ है वैसे तो ब्रह्मांड एक विस्फोट के कारण बना था पहले ब्रम्हांड के अंदर कुछ नहीं था बिल्कुल खाली था फिर एक विस्फोट हुआ क्योंकि पहले जब ब्रह्मांड बिल्कुल शून्य के आकार का था तो यह बहुत गर्म था उस गर्मी के कारण इसमें एक विस्फोट हुआ और  उस विस्फोट से बरमान का निर्माण हुआ और आज के समय में ब्रह्मांड में बहुत से अनेक छोटे बड़े और बिल्कुल छोटे गए उपग्रह मौजूद हैं और इसके अलावा ब्रह्मांड में बहुत सी आकाशगंगा मौजूद है इसके अंदर लगभग 100 खरब तारे भी मौजूद है और इसके अलावा ब्रह्मांड के अंदर बहुत ज्यादा आकाशगंगाएं हैं  उन्ही ग्रहों में से एक ग्रह  भी सूर्य भी उन्हीं के अंदर से एक चीज है जो कि प्रमाण के अंदर मौजूद है और सूर्य का अपना एक सौर मंडल भी है जिस के अंदर सभी चीजें गतिमान है.
इन पिंड के अंदर 8 ग्रह और उनके 166 उपग्रह और 5 और छोटे पिंड शामिल है और इसके अलावा और भी अन्य छोटे-छोटे पिंड बने होते हैं जिसे हम सौर मंडल कहते हैं सौर मंडल के अंदर बहुत सी चीजें गति करती हैं और यह सभी चीजें सौर मंडल के अंदर सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है तो अब आपको पता चल गया होगा कि सौर मंडल क्या होता है तो आज हम आपको इस पोस्ट में सौर मंडल के बारे में और भी बहुत सी जानकारी और रोचक तथ्यों के बारे में बताएंगे जो कि शायद आपको बहुत ही पसंद आएंगे क्योंकि यह आपके सामान्य ज्ञान के लिए तो जाना बहुत जरुरी होता ही है यह कई बार आपके एग्जाम में भी इनके बारे में कुछ चीजें पूछ ली जाती है तो अगर आप यह जानकारी पढ़ोगे तो आप के सामान्य ज्ञान तो पड़ेगा ही और आप के एग्जाम में आने वाली चीजों का भी आप सही से जवाब दे पाओगे तो नीचे हम आपको सौरमंडल के बारे में कुछ और जानकारी दे रहे.

सौरमंडल और ब्रह्मांड के बारे में रोचक जानकारी

कई लोगों को सोचना है कि पृथ्वी सिर्फ हमारे लिए ही बनी है लेकिन ऐसा नहीं है गैलीलियो की टेलिस्कोप की खोज के बाद हमें पता चला कि हमारी पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और और बाकी अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं,

1. सूर्य

सबसे पहले हम बात करेंगे सूर्य सूर्य हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा पिंड है और यह पृथ्वी से 109 गुना बड़ा है और यह ऊर्जा का शक्तिशाली भंडार है और यह भंडार मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम का एक विशाल गोला है सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश को आने में 8 मिनट 30 सेकंड का समय लगता है इसी प्रकाश ऊर्जा से प्रकाश संश्लेषण नाम एक बहुत ही महत्वपूर्ण जैव रासायनिक अभिक्रिया होती है जो कि पृथ्वी पर जीवन का आधार है पृथ्वी के जलवायु और मौसम को प्रभावित करता है.

2.  बुद्ध

बुद्ध हमारे सौरमंडल के 8 ग्रहों में से सबसे छोटा ग्रह और सूर्य से सबसे निकटतम ग्रह है बुद्ध तकरीबन 70% धातु और 30 % सिलिकेट पदार्थ का बना हुआ है बुद्ध के सरफेस का गुरुत्वाकर्षण 3.7 मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर है.

3. शुक्र

शुक्र ग्रह यह ग्रह कभी स्वर्ग जैसा लगता था लेकिन एक थोड़े से संतुलन के बिगड़ने के कारण के यह नर्क के अंदर बदल गया यह ग्रह इतना गर्म है कि लोहा और शीशा भी पिघल जाएगा और यह बड़ी-बड़ी धातु को कुछ ही मिनटों में पिंगला सकता है वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पर पहले समुद्र हुआ करते थे वह आज के समय में वाष्प बनकर काल की गर्मी में मिल गए हैं शुक्र सरफेस की ग्रेविटी 1.87 मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर है जो कि लगभग हमारी पृथ्वी के बराबर है.

4.पृथ्वी

पृथ्वी यह वही जगह है जिसके ऊपर हम रैन बसेरा करते हैं जिसके ऊपर हमारा जीवन संभव है और हमारे साथ साथ अनेक प्रकार की जीव जंतु की प्रजाति भी इसके ऊपर रहती है और यह ब्रह्मांड का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां पर जीवन का अस्तित्व पाया गया है जिसके ऊपर जीवन संभव है और इसके बारे में तो हम सभी जानते ही हैं और इसकी ग्रेविटी 9.80 मीटर  प्रति सेकंड स्क्वायर है और इसके बारे में तो और भी बहुत सी बातें हैं जो कि आप जानते ही होंगे क्योंकि यह सभी आपके आसपास की चीजों से ही बनाई हुई है इसके ऊपर ब्रह्मांड का सबसे अच्छा पर्यावरण पाया जाता है जो कि अन्य किसी भी ब्रह्मांड के ग्रह या उपग्रह के अंदर नहीं पाया जाता इसीलिए इसके ऊपर जीवन जीना संभव हुआ है.

5. मंगल

मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है पृथ्वी से इसकी दशा रतिन्न दिखती है जिसके कारण इसे लाल ग्रह भी कहा जाता है और सौरमंडल का सबसे ऊंचा पर्वत ओलंपस मून मंगल ग्रह के ऊपर स्थित है मंगल के दो चंद्रमा है फोर्ब्स और डीमोस जो छोटे और अनियमित आकार के हैं मंगल पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है मंगल ग्रह की सरफेस व्यास का की ग्रेविटी 3.7 11 प्रति सेकंड प्यार है.

5. बृहस्पति

बृहस्पति सूर्य से अलग उसका पांचवा का सबसे बड़ा ग्रह है बृहस्पति अनेक संस्कृतियों और पौराणिक और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ था रोमन सभ्यता लोगो ने अपने देवता जो Jupiter के नाम से इसका का नाम रखा था बृहस्पति के कम से कम 64 चंद्रमा है इनके अंदर विचार सबसे बड़े चंद्रमा में शामिल है गैलीलियन चंद्रमा कहा जाता है  जैसे 1610 में पहली बार गैलीलियो गैलीली द्वारा खोजा गया था गैलीमिट सबसे बड़ा चंद्रमा है जिसका व्यास बुध से ग्रह से भी ज्यादा है. 

6.शनि

शनि ग्रह जिसको हम Saturn ग्रह के नाम से भी जानते हैं सूर्य के बाद यह छोटा ग्रह है तथा बृहस्पति के बाद सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है शनि के कम से कम 62 चंद्रमा है उनके अंदर 13 के सिर्फ औपचारिक नाम है शनि देव के साइड में कुछ बर्फ के कण आज से करोड़ों साल पहले से उस का चक्कर लगा रहे हैं इसका एक टुकड़ा हमारे एक चांद के बराबर है.

7.अरुण

यूरेनस जिसे हिंदी में अरुण ग्रह कहते हैं यह हमारे सौरमंडल में सूर्य के बाद सातवां ग्रह हैं उसके आधार पर सौरमंडल का तीसरा और द्रव्यमान के आधार पर यह चौथा बड़ा ग्रह है 13 मार्च 1981 में विलियम हरशल नाम के एक व्यक्ति ने की खोज की थी अरुण दूरबीन के द्वारा पाए जाने वाला पहला ग्रह है.और इसका भार पृथ्वी के बारे में सिर्फ पढ़े 14 गुना ज्यादा ही भारी है हमारे सौरमंडल के अंदर चार ग्रहों को गैस का दाना कहा जाता है क्योंकि इनके अंदर मिट्टी पत्थर की वजह ज्यादा गैस पाई जाती है और उनमें से अरुण ग्रह भी एक है यदि किसी तरह से अरुण ग्रह के बीच में जाकर इसका केंद्र देखा जाए तो वहां पर बर्फ और पत्थर पाए जाते हैं.

8.नेप्च्यून

वरुण ग्रह जिसे हम नेप्च्यून के नाम से भी जानते हैं यह सौरमंडल से सूर्य का 8 ग्रह है नेपच्यून ऐसा ग्रह है जिस को बिना देखे ही उसकी खोज की भविष्यवाणी के दीऔर बह  गणित के अध्ययन से की गई थी जिसे फिर उसके आधार पर खोजा गया यह तब हुआ था जब   अरुण परिक्रमा में कुछ दिक्कत पाई गई जिसका परिणाम सिर्फ यही हो सकता था कि उसका कोई अज्ञात ग्रह गुरुत्वाकर्षण बल    डाल रहा है जिसके कारण खगोल की खोजबीन करने के बाद यह अज्ञात ग्रह 23 सितंबर 1986 को पहली बार दूरबीन से देखा गया और इसका नाम रख दिया नेप्च्यून गया.
यह तो हमने जानकारी दीजिए आपको सौरमंडल के बारे में क्या आप यह जानते हैं कि जो आसमान के अंदर हमें ऊपर तारे दिखाई देते हैं वह क्या चीज है वह हमारे से लगभग लाखों प्रकाश वर्ष दूर है प्रकाश वर्ष किसे कहते हैं जिसको हमारी पृथ्वी तक पहुंचने में 1 साल लग जाए. उसे  प्रकाश वर्ष  कहते है. बल्कि ब्रह्मांड की सबसे तेज चीज प्रकाश है प्रकाश की स्पीड 1,86 लाख पर सेकंड है इसलिए हम तारों के पास आने वाले हजारों साल तक तो नहीं जा पाएंगे इनके अंदर से कुछ ऐसे तारे भी होते है. जो कि खत्म हो चुके होते हैं लेकिन फिर भी उन की रोशनी यहां तक दिखाई देती है कुछ ऐसी भी तारे होते हैं जो कि दूसरे ब्रह्मांड के होते हैं वह भी हमें यहां पर दिखाई देते हैं अब हम आपको यह बताएंगे दूसरे ब्रह्मांड क्या होते हैं हर सौरमंडल का एक ब्रह्मांड होता है हम जिस सौरमंडल के अंदर रहते हैं और उसके अलावा ऐसे और भी करोड़ों तारे हैं और भी ऐसे ग्रह है लेकिन तारों की अपेक्षा ग्रहों की मात्रा ज्यादा है ब्रह्मांडों के भी महा ब्रह्मांड होते हैं  यह जानकारी हमें कुछ समय पहले ही पता चली है यही हमारा अनंत ब्रह्मांड होता है जिसकी कल्पना करना भी बहुत मुश्किल है इस ब्रम्हांड के अंदर ऐसे और भी अनेक ब्रह्मांड है जिसकी मानव जाति कल्पना भी नहीं कर सकती हमारी पृथ्वी समुंदर के एक बूंद के बराबर है और ब्रह्मांड के अंदर हमारा एक तिनके के बराबर भी अस्तित्व नहीं है.
और इन ब्रह्मांडों के अंदर तारों और ग्रहों की संख्या बढ़ती ही जाती है लेकिन कई बार कुछ ऐसी परिस्थिति होती है जिसके कारण इन ब्रह्मांडों के अंदर कुछ ग्रह आपस में टकरा जाते हैं और उनके नए ग्रह या छोटे ग्रह बन जाते हैं लेकिन यह सब ब्रह्मांड के अंदर होता रहता है क्योंकि हमारे ब्रह्मांड के अंदर सभी चीज गतिमान है सभी चीजें आपस में एक दूसरे के चक्कर लगाती रहती है कई बार परिक्रमा करते समय यह स्थिति होती है कि जब भी एक सामने आ जाते हैं और उनमें टकराव होने के कारण यह छोटे और बड़े या उनका में तब्दील हो जाते हैं लेकिन हमारा ब्रह्मांड बहुत बड़ा है और इसके अंदर अनेक ग्रह और उपग्रह शामिल हैं.
अब आपको ब्रह्मांड और सौरमंडल के बारे में पता चल गया होगा की ब्रह्मांड और सौरमंडल क्या होते हैं और यह कैसे बने और किस तरह से इसके अंदर और अनेक उपग्रह और ग्रह हैं और क्या करते हैं इसमें बहुत सी अच्छी जानकारी हमने आज आपको दी इसके अंदर हमने आपको ब्रह्मांड की उत्पत्ति ब्रह्माण्ड विज्ञान ब्रह्मांड के रहस्य ब्रह्मांड क्या है ब्रह्मांड कैसे बना ब्रह्माण्ड क्या है सौर मंडल में कितने ग्रह होते है सौरमंडल का रहस्य सौर मंडल चित्र सौर मंडल चित्र hd सौर मंडल की उत्पत्ति सौरमंडल के ग्रहों के नाम सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह ब्रह्मांड की परिभाषा सौरमंडल और ब्रह्मांड के बारे में बहुत अच्छी जानकारी स्टेप बाय स्टेप दी और इसमें हमने आपको सौरमंडल के आठ ग्रहों के बारे में भी जानकारी विस्तार से बताई है तो यदि आपको यह जानकारी पसंद आए तो शेयर करना ना भूलें और यदि इसका के बारे में आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो आप नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं.
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सोलह महाजनपद और उनकी राजधानी

बौद्ध और जैन धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि ईसा पूर्व छठी शताब्दी का भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था. उस समय उत्तरी भारत में सोलह महाजनपद (Sixteen Mahajanapada) अर्थात् बड़े राज्यों का अस्तित्व था. ये राज्य बड़े राज्य इसलिए कहलाते थे क्योंकि इनका आकार वैदिक युगीन कबीलाई राज्यों से बड़ा था. कबीलाई राज्यों के स्थान पर महाजनपद (या जनपद राज्य) इसलिए बने क्योंकि लोहे के प्रयोग के कारण युद्ध अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरणों द्वारा योद्धा और कृषक अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक सफलता पा सके. महाजनपद कालीन प्रमुख राज्यों की राजधानी (capitals) को इंगित करते हुए उनके इकाइयों का संक्षिप्त विवरण (Brief Information) नीचे दिया गया है.

सोलह महाजनपद और उनकी राजधानी 

Mahajanapada_capitals

अंग

यह महाजनपद मगध राज्य के पूर्व में स्थित था. इसकी राजधानी चंपा थी. आधुनिक भागलपुर और मुंगेर का क्षेत्र इसी जनपद में शामिल था. गौतम बुद्ध के समय में इस राज्य का मगध के साथ संघर्ष चलता रहा. संभवतः प्रारभ में अंग ने कुछ समय के लिए मगध को पराजित कर अपने में शामिल कर लिया. लेकिन शीघ्र ही इस जनपद की शक्ति क्षीण हो गयी और बिम्बिसार नामक शासक ने न केवल मगध को अंग से स्वतंत्र कराया बल्कि उसने अंग को भी अपने अधीन किया. कालांतर में यह राज्य मगध राज्य का ही हिस्सा बन गया.

मगध

बौद्ध साहित्य में इस राज्य की राजधानी (गिरिव्रज या राजगीर) और निवासियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है. वर्तमान पटना और गया जिलों के क्षेत्र इसके अंग थे. अथर्ववेद में भी इस राज्य का उल्लेख है.

काशी

इसकी राजधानी वाराणसी (बनारस) थी. काशी के कौसल, मगध और अंग राज्यों से सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे और प्रायः उसे उसने संघर्षरत रहना पड़ा. गौतम बुद्ध के समय में काशी राज्य का राजनैतिक पतन हो गया.

वृज्जि या वज्जि संघ

यह महाजनपद मगध के उत्तर में स्थित था. यह संघ आठ कुलों के संयोंग से बना और इनमें चार (विदेह, ज्ञातृक, वज्जि और लिच्छवि) कुल अधिक प्रमुख थे. विशाल इस संघ की राजधानी थी.

कोसल

इन जनपद की सीमाएँ पूर्व में सदानीर नदी (गण्डक), पश्चिम में पंचाल, सर्पिका या स्यन्दिका नदी (सई नदी) दक्षिण और उत्तर में नेपाल की तलपटी थी. सरयू नदी इसे (कोसल जनपद को) दो भागों में विभाजित करती थी. एक उत्तरी कोसल जिसकी राजधानी श्रावस्ती थी और दूसरा दक्षिणी कोसल, जिसकी राजधानी कुशावती थी.

मल्ल

यह जनपद वज्जि संघ के उत्तर में स्थित एक पहाड़ी राज्य था. इसके दो भाग थे जिनमें एक की राजधानी कुशीनगर (जहाँ महात्मा बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ) और दूसरे भाग की राजधानी पावा (जहाँ वर्धमान महावीर को निर्वाण मिला) थी.

चेदि

यह महाजनपद यमुना नदी के किनारे स्थित था. यह आधुनिक बुन्देलखंड के पूर्वी भाग और उसके समीपवर्ती भूखंड में फैला हुआ था. महाभारत के अनुसार “शुक्तिमती” इसकी राजधानी थी लेकिन “चेतियजातक” के अनुसार “सोत्थिवती” इसकी राजधानी थी. महाभारत के अनुसार शिशुपाल यहीं का शासक था.

वत्स

काशी के पश्चिम भाग में प्रयाग के आसपास क्षेत्र में यह जनपद स्थित था. कौशाम्बी इसकी राजधानी थी. बुद्ध के समय में इसका शासक उदयन था.

कुरु

उत्तर वैदिक साहित्य में इस जनपद के पर्याप्त विवरण प्राप्त होते हैं. इसके थानेश्वर (हरियाणा राज्य में) दिल्ली और मेरठ का क्षेत्र सम्मिलित थे. इसकी राजधानी इन्द्रप्रस्थ (हस्तिनापुर) थी.

पंचाल

यह जनपद उत्तर वैदिक काल में ही प्रसिद्ध था. इसमें वर्तमान रूबेलखंड और उसके समीप के कुछ जिले सम्मिलित थे. इसके दो भाग थे – उत्तरी पंचाल और दक्षिणी पंचाल. उत्तरी पंचाल की राजधानी अहिच्छत्र और दक्षिणी पंचाल की राजधानी काम्पिल्य थी. मूलतः यह जनपद एक राजतंत्र था लेकिन संभवतः कौटिल्य के काल में यहाँ गणतंत्रीय शासन व्यवस्था हो गयी.

मत्स्य

इस जनपद में आधुनिक राजस्थान राज्य के जयपुर और अलवर जिले शामिल थे. विराट नगर संभवतः इसकी राजधानी थी. सम्भवतः यह जनपद कभी चेदि राज्य के अधीन रहा था.

शूरसेन

मथुरा और उसके आसपास के क्षेत्र इस जनपद में शामिल थे. आधुनिक मथुरा नगर ही इसकी राजधानी था. बौद्ध ग्रन्थों में अयन्तिपुत्र शूरसेन राज्य का उल्लेख मिलता है. वह बौद्ध धर्म का अनुयायी और संरक्षक था.

अस्सक या अस्मक

यह राज्य गोदावरी नदी के किनारे पर स्थित था. पाटेन अथवा पोटन इसकी राजधानी थी. पुराणों के अनुसार इस महाजनपद के शासक इक्ष्वाकु वंश के थे. जातक कथाओं में भी इस जनपद के अनेक राजाओं के नामों की जानकारी मिलती है.

अवन्ति

अवंति राजतंत्र में लगभग उज्जैन प्रदेश और उसके आसपास के जिले थे. पुराणों के अनुसार पुणिक नामक सेनापति ने यदुवंशीय वीतिहोत्र नामक शासक की हत्या करके अपने पुत्र प्रद्योत को अवन्ति की गद्दी पर बैठाया. इसके अंतिम शासक नन्दवर्धन को मगध के शासक शिशुनाग ने पराजित किया और इसे अपने साम्राज्य का अंग बना लिया. यह महाजनपद दो भागों में विभाजित था. उत्तरी भाग की राजधानी उज्जयिनी और दक्षिणी भाग की राजधानी महिष्मतिथी.

कम्बोज

यह राज्य गांधार के पड़ोस में था. कश्मीर के कुछ भाग जैसे राजोरी और हजार जिले इसमें शामिल थे. संभवतः राजपुर या हाटक इसकी राजधानी थी.

गांधार

इस जनपद में वर्तमान पेशावर, रावलपिण्डी और कुछ कश्मीर का भाग भी शामिल था. तक्षशिला इसकी राजधानी थी. गांधार का राजा पुमकुसाटी गौतम बुद्ध और बिम्बिसार का समकालीन था. उसने अवंति के राजा प्रद्योत से कई युद्ध किए और उसे पराजित किया. इसकी राजधानी विद्या का केंद्र था. देश-विदेश से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते थे.

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भारत में बहुद्देशीय सिंचाई, बाँध, नदी परियोजनाएँ


भारत में सिंचाई के प्रमुख साधनों के अंतर्गत नहरें, कुएँ, नलकूप डीजल, तालाब आदि आते हैं. 1951 में भारत का कुल सिंचित क्षेत 226 लाख हेक्टेयर था, वहीं मार्च 2010 तक बढ़कर 10.82 करोड़ हेक्टेयर तक पहुँच गया. सिंचाई परियोजनाओं की क्षमता के आधार पर प्रकृति निर्धारित की जाती है. इस पोस्ट में हम उन्हीं बहुद्देशीय सिंचाई, बाँध और नदी परियोजनाओं (multi-purpose irrigation projects in Hindi) के विषय में आपको बताएँगे जो प्रायः परीक्षा में सवाल के रूप में अपना स्थान रखते हैं.
परियोजनाएँक्षमता
लघु सिंचाई परियोजनाएँ 2000 हेक्टेयर से कम क्षेत्र. इसके अंतर्गत कुआँ, नलकूप, डीजल पम्पसेट इत्यादि आते हैं. 2010 में राष्ट्रीय लघु सिंचाई मिशन शुरू की गई.
मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ 2000 हेक्टेयर से 10,000 हेक्टेयर के बीच. नहरें आदि.
वृहत सिंचाई परियोजनाएँ  10000 हेक्टयर से अधिक. बाँध इसके उदाहरण हैं. देश की 38% सिंचाई आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं.

भारत में बहुद्देशीय सिंचाई परियोजनाएँ – Multi-purpose Irrigation Projects in India

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दामोदर घाटी परियोजना (Damodar Valley Project)

  • स्वतंत्र भारत की प्रथम बहुद्देशीय परियोजना है.
  • इसका विस्तार झारखण्ड और प.बंगाल में है.
  • संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना, (1933) के आधार पर 1948 में इसका विकास किया गया.
  • 1948 से “DVC” दामोदर वैली कोपेरेशन की शुरुआत हुई.
  • दामोदर नदी छोटानागपुर की पहाड़ियों से निकलकर प.बंगाल में हुगली नदी से मिल जाती है.
  • इस परियोजना पर तिलैया, कोनार, मैथन, पंचेत बाँध बनाए गए.
  • बोकारो, दुर्गापुर, चंद्र्पुआ, पतरातू में ताप बिजली गृहों का निर्माण किया गया.

भाखड़ा नांगल परियोजना (Bhakra Nangal Project)

  • यह परियोजना पंजाब तथा हिमाचल में सतलज नदी पर बनाई गयी है.
  • यह देश की सबसे बड़ी बहुद्देशीय परियोजना है.
  • यह संसार का सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बाँध (226 मी.) है.
  • गोविन्द सागर बाँध (हिमाचल प्रदेश) इसी पर है.
  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश इससे लाभान्वित हैं.

रिहंद बाँध परियोजना (Rihand Dam Project)

  • सोन नदी की सहायक नदी पर रिहंद बाँध पर बनाया  गया.
  • बाँध के पीछे “गोविन्द वल्लभ पन्त सागर” नामक कृत्रिम झील बनाई गई.
  • “गोविन्द वल्लभ पन्त सागर” भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है.
  • यह मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है.

हीराकुड बाँध परियोजना (Hirakud Dam Project)

उड़ीसा संभलपुर के निकट महानदी पर बनाया गया है तथा संसार का सबसे लम्बा बाँध है.

गंडक परियोजना (Gandak Project)

  • यह भी नेपाल के सहयोग से पूरी की गई है.
  • इसमें मुख्य नाहर गंडक पर बने वाल्मिकी नगर बैराज से निकाली गई है.

कोसी परियोजना (Kosi Project)

  • यह बिहार राज्य में नेपाल के सहयोग से पूरी की गई है.
  • विनाशकारी बाढ़ों के कारण कोसी को “उत्तरी बिहार का शोक” कहा जाता है.
  • मुख्य नहर कोसी पर बने हनुमान नगर बैराज (नेपाल) से निकाली गई है.
  • भविष्य में इस योजना के शक्ति गृहों को दामोदर घाटी परियोजना के शक्तिगृहों से मिलाकर नेटवर्क बनाने की भी योजना है.

इंदिरा गाँधी (राजस्थान नहर) परियोजना (Indira Gandhi Project)

  • इस परियोजना में रावी और व्यास नदियों का जल सतलज नदी में लाया जाता है.
  • व्यास नदी पर पोंग नामक बाँध बनाया गया है.
  • इसका मुख उद्देश्य नए क्षेत्रों को सिंचित करके कृषि योग्य बनाना है.
  • यह संसार की सबसे लम्बी नहर है. जिससे उत्तर प्रदेश, राजस्थान के गंग नहर – बीकानेर, जैसलमेर जिलों की सिंचाई की जाती है.

चम्बल परियोजना (Chambal Project)

  • यमुना की सहायक चम्बल नदी के जल का उपयोग करने के लिए मध्य प्रदेश व राजस्थान ने यह परियोजना संयुक्त रूप से बनायी गई है.
  • इस परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश से गांधी सागर बाँध तथा राजस्थान में राणा प्रताप सागर बाँध, जवाहर सागर बाँध तथा कोटा बैराज बनाए गए हैं.
  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश चम्बल नदी की द्रोणी में मृदा का संरक्षण करना है.

नागार्जुन परियोजना (Nagarjun Project)

  • यह आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर बनायी गई है.
  • बौध विद्वान् नागार्जुन के नाम पर इसका नाम “नागार्जुन सागर” रखा गया.

तुंगभद्रा परियोजना (Tungabhadra Dam Project)

यह आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्यों के सहयोग से कृष्णा की सहायक तुंगभद्र नदी पर मल्लपुरम के निकट बनाया गया है.

मयूराक्षी परियोजना (Mayurakshi Dam Project)

  • छोटा नागपुर  पठार के उत्तर-पूर्वी भाग की एक छोटी नदी मयूराक्षी के मसानजोर नामक स्थान पर बांधकर झारखण्ड को बिजली से और प. बंगाल को सिंचाई की नहरों से लाभान्वित किया जा रहा है.
  • इसे “कनाडा बाँध” भी कहते हैं.

शरावती परियोजना (Sharavathi Dam Project)

  • यह कर्णाटक में भारत के सबसे ऊँचे जोग या महात्मा गांधी जलप्रपात पर बनाया गया है.
  • यहाँ से बंगलौर के औद्योगिक क्षेत्र तथा गोवा और तमिलनाडु राज्यों को भी बिजली भेजी जाती है.

कोयना परियोजना (Koyna Dam Project)

  • यह परियोजना महाराष्ट्र के कृष्णा की सहायक कोयना नदी पर है.
  • मुंबई-पुणे औद्योगिक क्षेत्र को यहीं से बिजली भेजी जाती है.

बगलिहार परियोजना (Baglihar Dam Project)

यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर 450 मेगावाट की जलबिजली परियोजना है.
इसके  निर्माण को 1960 की सिन्धु जल संधि का उल्लंघन माना जाता है.

किशनगंगा परियोजना (Kishanganga Dam Project)

यह जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी पर 330 मेगावाट की जलबिजली परियोजना है.
इस पर भूमिगत सुरंग बनाने की भी बात है.
झेलम नदी पर ही बनाई जा अहि बुलर बैरपे परियोजना को लेकर दोनों देशों में विवाद है.
पाकिस्तान इसे 1960  के सिन्धु जल समझौते का उल्लंघन मानता है.

केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken-Betwa Link Project)

  • इसका शुभारम्भ 2005 को प्रायद्वीपीय नदी विकास योजना के अंतर्गत किया गया.
  • इस परिजना का नाम “अमृत क्रांति परियोजना” भी है.
  • इसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चलाया जा रहा है.
  • इसकी क्षमता लगभग 9 लाख हेक्टयेर की सिंचाई की है.
  • इस पर 72 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.
  • “दौधन बाँध” केन-बेतवा लिंक को जोड़ने हेतु बनाया गया है.
  • बनवा बाँध जलाशय बेतवा नदी पर मिलाया जायेगा.

सरदार सरोवर परियोजना (Sardar Sarovar Project)

  • मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात व अजस्थान की संयुक्त परियोजना है.
  • यह नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर बने जा रही है.
  • इसमें कुल 6 बहुद्देशीय, 5 जलबिजली, 15 सिंचाई परियोजनाएँ हैं.
  • पूर्ण होने पर यह भारत की सबसे बड़ी कमान क्षेत्र विकसित परियोजना होगी.
  • इसका उद्देश्य सिंचाई के अलावा, घरेलू जलापूर्ति, रोजगार, पशुपालन, मत्स्यकी, बाढ़ नियंत्रण व नहरी परिवहन है.
  • इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा.

टिहरी परियोजना (Tehri Project)

  • उत्तराखंड में भागीरथी व भिलांगना नदी के संगम पर बनाया गया है.
  • यह विश्व का सबसे ऊँचा चट्टान आपूरित बाँध होगा.
  • यह परियोजना तीन स्तरों पर चलाई जा रही है – प्रथम चरण- 1000 मेगावाट, द्वितीय चरण 1400 मेगावाट, तृतीय चरण 2400 मेगावाट.
  • क्षमता 2.7 लाख हेक्टयर सिंचाई की है.
  • बाढ़ तथा सूखा को कम करना, मत्स्य पालन, नहरी परिवहन इसका उद्देश्य है. अन्य उद्देश्य रोजगार बढ़ाना तथा विकास कार्य में प्रगति है.
  • यह भूकम्प क्षेत्र के जोन V में आता है. इसके महान टियर फौल्ट पर स्थित होने के कारण यह आशंका और भी बढ़ जाती है.

देवसारी बाँध परियोजना (Devsari Dam Project)

  • उत्तराखंड की पिंडर घाटी में गढ़वाल के चमोली जिले में पिन्डनू नदी पर यह परियोजना है.
  • भूकंप जोन 4 और 5 में यह आता है.
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